The blank eyes behind a smile

कल उनको मिलने गयी थी| हाथ में मिठाई का डब्बा दिया | सभी खुश हो गए | हमने तस्वीर भी ली साथ में | फेसबुक पर सब ने प्रशंसा की, कुछ प्रेरित भी हुए| पर आज मैं दुखी थी | जिन लोगों से कल मिली उनका तो आज कल से कितना भिन्न हो गया | शायद तकलीफ ज्यादा हो गयी होगी | बच्चों की आस बढ़ गयी होगी | जिद कर रहे होंगे | इससे अच्छा कुछ सिखा देती | अगले दिन मिठाई का डब्बा खुद खरीद पाते |

” थोड़ी सी बारिश अधिक गर्मी पैदा करती है | ” कहीं पढ़ा था , शायद पांचवी की हिंदी कहानियों में | इसलिए देते वक़्त ध्यान रखती हूँ, अगला इच्छाओं की अधिक गर्मी सह पायेगा या नहीं | इसलिए संभलकर देती हूँ, तकलीफ बढ़ जाए, ऐसा कुछ नहीं करती |

अपने घर के बच्चों के जन्मदिन में गरीब बच्चों को बुलाकर केक नहीं खिलाती| बच्चे को गोद में लेकर उसके हाथ वंचित बच्चों को तोहफे नहीं दिलवाती, तस्वीर नहीं खिंचवाती | अलग से देती हूँ , दूसरे मौकों पर | जब उन्हें ये एहसास कम हो कि भगवान् ने उनके साथ बहुत भेदभाव किया है | कुछ बच्चों को फर्क नहीं पड़ता | वे भूल जाते हैं | कुछ सवेंदनशील होते हैं | भगवान् को, जीवन को, माँबाप को, और खुद को कोसते हैं | इसलिए संभलकर देती हूँ, तकलीफ बढ़ जाए, ऐसा कुछ नहीं करती |

कोशिश और इच्छा तो ये है कि सब अपना जन्मदिन मना सकें| अच्छा खाने के लिए दोस्तों के घर जन्मदिन में जाएँ, तस्वीर खिंचवाने मालिक के यहाँ नहीं |

कुछ लोगों को गलत लग सकता है , जो भी मैं कह रही हूँ | मुझे भी कभी – कभी लगता है कि मेरी सोच गलत है | शायद एक मुस्कराहट देना भी अच्छा है | मैं भी कोशिश करती हूँ, देश में थी, तो बच्चों को, जरूरतमंदों को मुस्कराहट देती थी ,अच्छा लगता था | अभी विदेश में हूँ तो यहाँ भी जितना बन पड़ता है, मुस्कराहट देती हूँ , कभी पैसे या कभी खाना | वैसे तो ये अच्छा है कि यहाँ कोई बच्चा सड़क पर नहीं होता पर जरूरतमंदों की कमी नहीं है | ये धारणा गलत है कि विदेश में लोग हाथ नहीं फैलाते | हाँ , तरीका अलग होता है | स्वाभाविक है, अंग्रेजी में आग्रह करते हैं | कुछ लोग गाकर या कुछ बजाकर मांगते हैं | पर मांगते हैं | मैं भी बात को कहाँ से कहाँ ले कर चली गयी |

तो बात बस इतनी सी है कि मुझे एक बार की ख़ुशी की बनिस्पत सशक्तिकरण बेहतर लगता है |

कनाडा में जहाँ हमने  किराए पर घर लिया है, उसे टोरंटो का सबसे बड़ा और वंचित समुदाय माना जाता है | यहाँ की जनसँख्या २३००० है जिसमे १०० से अधिक देशों के लोग रहते हैं और लगभग १६० भाषाएं बोली जाती हैं | वंचित या गरीब होना भी एक धारणा है | मुझे तो बिलकुल वंचित नहीं लगते | हाथ में कॉफ़ी का गिलास, शरीर पर गरम कपडे, विकलांगो के पास बटन वाले आधुनिक व्हीलचेयर, रहने के लिए जरूरतमंदों को सरकार द्वारा दिया गया मुफ्त घर, घर में स्टोव, ओवन , बिजली , हीटर | पर हाँ, कुछ घरों में कॉकरोच, खटमल होते हैं, बहुतों के पास नौकरी नहीं है, सरकार कुछ भत्ता देती है शायद | ज्यादातर अकेले रहते हैं, नशे के अधीन हो जाते हैं , शायद इसी को यहाँ गरीबी कहते हैं | हमारे यहाँ तो गरीबी की परिभाषा अलग है | आप भी मानते होंगे |

इसी गरीबी को दूर करने के लिए इस समुदाय में २० से ज्यादा गैर सरकारी संस्थाएं (NGO )सरकार से मिलकर काम कर रही है | बहुत कुछ मुफ्त में देने का प्रावधान है | कुछ बँटने वाला हो, तो लोग पंक्ति में खड़े हो जाते हैं | मुझे अच्छा नहीं लगता | संस्थाओं पर थोड़ा गुस्सा और लोगों पर थोड़ी दया आती है | ज्यादातर संस्थाओं के पास पैसों की कमी नहीं लगती | खाने की चीज़ें खूब बांटते हैं | लोग खुश दिखते हैं | ऐसा लगता है, लोगों  को पंक्ति में खड़े रहने की आदत हो गयी है |

मैं भी एक NGO में काम करती हूँ | ईश्वर की कृपा और मेरे थोड़े प्रयास से इस NGO में सभी बराबर हैं | मूलतः हम एक कोआपरेटिव हैं | यहाँ कोई दयापात्र नहीं होता | हम लोगो के बीच एक दूसरे को मदद करने की प्रविर्ती बढ़ाते हैं | मेरा मानना है कि हर किसी में कुछ न कुछ गुण होता है | हर कोई एक दूसरे को सीखा सकता है | जरूरत के समय सहारा बन सकता है  | मेहनत से , हक़ से इच्छाओं को पूरा कर सकता है |

हमारे यहाँ किसी पंक्ति में खड़े होने की जरुरत नहीं | सशक्त होना सिखाते हैं, रोजगार के अवसर से अवगत कराते हैं | बराबर होने का एहसास देते हैं | दान नहीं समय देते हैं | मुझे ख़ुशी होती है | संसाधन होंगे तो जहाँ भी रहूंगी , देश या विदेश, अच्छे अवसर दूंगी ताकि सभी कमा सकें | बच्चों को अच्छी शिक्षा दे सकें | कोई पंक्ति हो | किसी का इंतज़ार हो | खाली आँखें हो |

 

Advertisements

5 thoughts on “The blank eyes behind a smile

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s